सरकार का बड़ा कदम: परिजनों को नहीं सौंपे जाएंगे आतंकियों के शव, अनजान जगह पर सुरक्षाबल ही कर देंगे उन्हें दफन

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद अब सरकार कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है। स्थानीय युवाओं को आतंकी संगठनों में जाने से रोकने के लिए अब सुरक्षा एजेंसियां मुठभेड़ के बाद मारे जाने वाले आतंकियों के शवों को खुद ही दफनाने का विचार कर रही हैं। इससे शवों को परिजनों को सौंपने संबंधी रवायत खत्म हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब भी कोई स्थानीय आतंकी मारा जाता है तो बड़ी संख्या में लोग उसके जनाजे में शामिल होते हैं और भारत विरोधी नारे लगाते हैं।à¤à¤¤à¤à¤à¤¿à¤¯à¥à¤ à¤à¥ ढà¥à¤° à¤à¤°à¤¨à¥ à¤à¥ बाद सà¥à¤°à¤à¥à¤·à¤¾à¤¬à¤² हॠà¤à¤° दà¥à¤à¤à¥ à¤à¤¨à¥à¤¹à¥à¤ दफन, परिवार à¤à¥ नहà¥à¤ मिलà¥à¤à¤à¥ शव!

यहां तक कि आतंकियों के शवों को आईएस और पाकिस्तानी झंडों में लपेटकर जनाजा निकाला जाता है और इस दौरान कई बार भड़काऊ भाषण भी दिए जाते रहे हैं। ऐसी तस्वीरें सामने आने के बाद कई बार यह मांग उठ चुकी है कि आतंकियों के शवों को परिजनों को ना सौंपा जाए।

दरअसल आतंकी कमांडर इन्हीं जनाजों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर स्थानीय युवाओं का ब्रेन वॉश करते हैं और उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई बार तो ऐसी खबरें आईं हैं कि आतंकियों के जनाजे में शामिल होने के अगले ही दिन कई युवा आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां अब शीर्ष आतंकी कमांडरों के शवों को किसी गुप्त स्थान पर दफन करने का विचार कर रही हैं।

हाल ही में सुरक्षाबलों द्वारा श्रीनगर के बाहरी इलाके में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकी मुगीस अहमद मीर के जनाजे में समर्थकों ने उसके शव को इस्लामिक स्टेट के झंडे में लपेटकर अंतिम यात्रा निकाली थी और इस दौरान भारत विरोधी नारे लगाए गए थे। यही नहीं पिछले महीने शोपियां की जामिया मस्जिद में आतंकी सद्दाम के जनाजे में भी हजारों लोग शामिल हुए थे।

Web Title : Big Government move: relatives of dead body will not be handed over to family